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Mangal ki mool bhawani | मंगल की मूल भवानी, शरणा तेरा है

 

मंगल की मूल भवानी, शरणा तेरा है।

शरणा तेरी है, आसरा तेरा है।।

मैया हे ब्रह्मा की पुत्री, लेकर ज्ञान सुरग से उतरी।

आज तेरी कथा बनाकर सुधरी, प्रथम मनाया हूँ।।1।।

​मैया भवन बनाया जालिका हार गुंथ ल्याय मालिका।

ध्यान धर कलकत्ता वाली को, पुष्प चढ़ाया है।।2।।

​मैया महिषासुर को मार्या, अपने बल से धरन पछाड़या।

 हाथ लिये खांडा दुधारा, असुर संहारया है।।3।।

​कहता शंकर जटोलि वाला, हर दम रटे गुरु की माला।

खोल मेरे हृदय का ताला, विद्या वर पाया है।।4।।

मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये

मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये



 मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये

हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये



गैरो ने ठुकराया अपने भी बदल गये है

हम साथ चले जिनके वो दूर निकल गये है

तेरे ही करम पर हूँ , तू बकश या ठुकराये

मुँह फेर जिधर......


माना के मैं पापी हूँ मुझे खबर गुनायो की

बस इतनी सजा देना मुझे मेरे गुनायो की

तेरे दर हो सर मेरा , और साँस में तू आये

मुँह फेर जिधर.....


हम ख़ाख़ नशीनो की क्या खूब तमना है

तेरे नाम पे जीना है तेरे नाम पे मरना है

मरना है तो तेरी , चोखट पे ही मर जाये

मुँह फेर जिधर.....

माँ सुणल्यो, माँ सुणल्यो,माँ सुणल्यो शेरावालीये

 माँ सुणल्यो, माँ सुणल्यो,माँ सुणल्यो शेरावालीये 




माँ सुणल्यो, माँ सुणल्यो,माँ सुणल्यो शेरावालीये कबस्यु पुकारू मैया सुणल्यो जोतावालिये ।।टेर।।

कब्सयू खड्यो हु तेरे दर को भिखारी ,
 सुणले ओ माता रानी अब तो हमारी ।।1।।


सिंधु सम हियो मेरो उमडयो माँ आवे,
काली घटा सम दोउ नैना बरसावे।।2।।


ज्यादा अब अइया मैया मत तरसाओ,
हिवड़ो तिहारो अम्बे मोम बनाओ ।।3।।

माफ करो भूल सब ममता की मैया,
ले वो पतवार पार करो मेरी नैया।।4।।


अरजी को गर नंद जोर है मेरो, 
कर दे मां मर्जी मंगल गावा जस थारो ।।5।।