ॐ गणेश वन्दना
(तर्ज : सावन का महिना..)
सब स्यूँ प्रथम मनावॉ, थॉने देवा रा सरदार।
रणत भंवर स्यूँ आप पधारो, हो रही जय जय कार ॥टेर॥
शंकर सुत थॉने, दुनिया है ध्यावे,
गिरिजा भवानी थॉने लाड लडावे।
थे मूसे चढ़कर आवो, थॉरी खूब करॉ मनुहार ॥१॥
रणत भंवर...
दुंद दुन्दाला थे हो, सूंड सूंडाला,
थॉरे गले में सोवे, मोतियन माला,
पीताम्बर वस्त्र रो, थे खूब करॉ श्रृंगार-२ ॥२॥
रणत भंवर...
लड्डुवन रो बाबा थॉरे भोग लगावाँ,
तिलक लगावा थॉने, मीठा भजन सुनावॉ-२
दयावन्त वर दायक, थे विनायक महाराज-२ ॥३॥
रणत भंवर...
शुभ काम हुआँ थॉने प्रथम मनावॉ,
शादी ब्याह में थॉने, प्रथम बुलावॉ
भगत थॉराँ गुण गावे, थे खूब भरो भण्डार ॥४॥
रणत भंवर...
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