सरस्वती वन्दना ॥ 🎶
(तर्ज: होंठों से छू लो तुम...)
हे स्वर की देवी माँ, संगीत की शिक्षा दो,
एक गीत सुनाना है, वाणी में मधुरता दो ॥ हे स्वर ॥१॥
अज्ञान ग्रस्त होकर, क्या गीत सुनाऊँ मैं,
टूटे हुए शब्दों से, क्या भजन बनाऊँ मैं,
गीतों के खज़ाने से, एक गीत की भिक्षा दो ॥ हे स्वर... ॥२॥
सरगम का ज्ञान नहीं, न लय का ठिकाना है,
कर आज सभा में माँ संगीत सुनाना है,
मुझे आज कृपा मैया, मत स्वर की परीक्षा लो, हे स्वर... ॥२॥
तुम विद्या की देवी, मैं विद्यार्थी तेरा,
पग पग पर बंधन है, मुझे कर्मों ने घेरा है
मैं शरण पड़ा तेरी, भावों को समीक्षा दो ॥ हे स्वर... ॥३॥
ॐ सर्व चैतन्य रूपं तां, आद्या देवी च धीमही।
बुद्धि या न प्रचोदयात्॥
वीणा पुस्तक कमल वाहिनी, तो रसना पर वास करो,
नित की नयो विकास करो ॥ वीणा ॥
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