हनुमानजी का भजन
(तर्ज़: थाली भरकर ल्याईं खीचड़ो)
निश दिन थारी कराँ आरती, भजन कराँ निष्काम हो,
बल बुद्धि द्यो, भक्ति अटल द्यो, महावीर हनुमान हो॥टेक॥
माँ अंजनी के पुत्र लाडले, शिव शंकर अवतारी हो।
लाल बरण थारे तन पर सोहे, सूरत लगे प्यारी हो॥१॥
ध्यान धरे तेरा नर नारी, महिमा थारी महान हो॥
शीश पे थारे मुकुट बिराजे, गले पुष्पों की माला हो।
कानन कुण्डल सोहे थारे, मस्तक तिलक विसाला हो।
पाँव में घुंघरु बाँधे के नाचे, जपे राम का नाम हो॥२॥
पुनरासर थारों भवन बिराजे, नित उठ नौबत बाजे है।
शंख नगाड़ा ढोलक बाजे, नर नारी सब जागे है।
लाडू पेड़ा ध्वजा नारियल, भेंट चढ़े थारे पान हो॥३॥
बड़े-बड़े कारज तू कीन्हां, संजीवन ले आये हो।
राम प्रभु को धीरज देकर, लक्ष्मण प्राण बचाये हो।
सीता की सुधि लेकर आये, राम दूत हनुमान हो॥४॥
सुन्दर बाग उजाड़ा तून्हां, तोड़-तोड़ फल खाये हो।
सोने की तुम लंका जलाये, रावण वंश मिटाये हो।
अजर अमर वर तुमको दिन्हां, खुश होकर श्री राम हो॥५॥
म्हारे भी संकट न टारो, थारी शरण में आया हो।
घर घर करूं मैं गुणगान थारो, चरणा ध्यान लगाया हो।
हारी भी बिगड़ी न बणादयो, पूरण करद्यों काम हो॥६॥
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