(तर्ज - दिल के अरमां आँसुओं में...
हे गजानन आपकी दरकार है ।
श्याम प्यारे का सजा दरबार है । टेर
शुभ घड़ी आई सुहानी आईये
ऋद्धि सिद्धि साथ अपने लाईये
आपकी महिमा तो अपरम्पार है ॥ 1 ॥
सबसे पहले आपकी सेवा करें
चरणों में सर को झुका वंदन करें
पहनिये फूलों के लाये हार हैं ॥ 2 ॥
देवताओं का लगा जमघट यहाँ
ये बतायें आप अब तक हैं कहाँ
हम सभी को आपका इन्तजार है ॥ 3 ॥
'सेवा केन्द्र' की विनती सुन लीजिये ;
बिन्नू की अरजी है दर्शन दीजिये
आपसे उत्सव की जय जयकार है ॥ 4 ॥
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