आओ आओ जी पार्वती रा लाल, गजानन्द थारो ध्यान धरीं।।
थे आवो रिद्ध-सिद्ध न ल्यावो, भूल न जावो आज।
सबसे पहलाँ सुमराँ थाने, सिध करो सब काज।
आओ आओ जी भक्ताँ रा प्रतिपाल, थारो गुणगान कराँ।। आओ .........
पिता तुम्हारा है शिवशंकर, पार्वती रा प्यारा।
थे म्हारै नैनाँ री ज्योति, थासूँ जग उजियारा।।
सब संकट दिज्यो टाल, गजानन्द थारो ध्यान धराँ।। आओ .........
सुंड सुंडाला दुंद-दुंदाला, कर में फरसो भारी।
गल बैजन्ती माला सोहे, मूसे की असवारी।।
थारो सुन्दर रूप विशाल, कांई तो बखान कराँ।। आओ .........
ना जाणू करणी कविताई, ना जाणा म्है छंद।
गजानन्द थारी कृपा सूं, गावे 'ताराचंद'।।
म्हारो कारज लिज्यो संभाल, चरण रज पान कराँ।। आओ .........
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