राम कहां जाए घनश्याम कहां जाए | Ram kahan Jaaye Ghanshyam kahan Jaaye
राम कहां जाए घनश्याम कहां जाए
नाम अनमोल सुबह श्याम लिया जाए
श्याम जी ने तो बंसी बजाई थी
सारी सखियों की सुध बिसराई थी,
कही चीर चुराए, कई गइया चुराईं,
सुनो जगवालों
राम कहां............
राम जी ने तो अहिल्या को तारा था
पाव छूते ही पार उतारा था,
पार भव से किया उसको दर्शन दिया, सुनो जगवाले
राम कहां...........
जब द्रोपदी का चीर उतारा था,
भरी सभा में श्याम पुकारा था,
सुनी उसकी पुकार दौड़े श्याम, सुनो जगवाले
राम कहां............
राम जी ने तो रावण मारा था,
सारे भक्तों का कष्ट निवरा था।
कही रावण तरे, कही विभीषण तरे, सुनो जगवालों
राम कहां ......…..
भक्त सुदामों जो मिलने को आए थे,
कच्चे चावल प्रेम से खाए थे,
पग धोते रहे, श्याम रोते रहे, सुनो जगवाले
राम कहां........
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