भजन
वन में देख्या दोय बनवासी, वारो मुख देख्या दुःख जासी ए माय।
वारो भजन कर्यां तिर जासी ए माय वन में....
भोजपत्र का वस्त्र पहिरे, वे तो अपने नगर होय आसी ए माय।
नयनो से सखी निरखण लायक, वाने कोण किया बनवासी ए माय।
धन वारी माता पिता वारी धन है, वे तो हिवड़ो फाट मर जासी ए माय।
तुलसीदास आस रघुवर की, वारे चरण कमल चित लासी ए माय।
वारो भजन करया सुख पासी ए माय। बनमें देख्या...
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