यह एक लोकप्रिय सत्संगी भजन है।
यह भजन विभिन्न कलाकारों द्वारा गाया गया है, जिनमें से एक नाम राजेश काला (Ralesh Kala) है, जबकि कई संस्करणों में इसे पारंपरिक (Traditional) या मीनाक्षी मुकेश और सत्येंद्र पाठक जैसे गायकों ने भी गाया है।
अक्सर, इस प्रकार के लोक और सत्संगी भजनों के लेखक पारंपरिक ही होते हैं, जिसका अर्थ है कि एक ही भजन को समय के साथ अलग-अलग गायकों ने गाया और प्रस्तुत किया है।
एक झोली में फूल भरे हैं,
एक झोली में काँटे, रे कोई कारण होगा,
तेरे बस में कुछ भी नहीं है, और बाँटने वाले बाँट रहे रे।।१।।
पहले बनती है तकदीर, फिर बनते है शरीर,
ये प्रभु की कारीगरी है, तू क्यूँ है गम्भीर ।।२।।
धन का बिस्तर मिल जाये, पर नींद को तरसें नैन
काँटे पर भी सोकर आये, किसी के मन में चैन ।।३।।
साँप भी डस जावे तो मिलता, किसी को जीवन दान,
चींटी से भी मिट सकता है, किसी का नामो निशान ।।४।।
सागर से भी बुझ नहीं सकती, कभी किसी की प्यास,
कभी किसी की एक बूँद से, हो जाती है पूर्ण प्यास ।।५।।
मंदिर में भी जाकर मिलता, नहीं है आत्म ज्ञान
कभी मिले मिट्टी से मोती, पत्थर से भगवान ।।६।।
रे कोई कारण होगा...
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