बार-बार मै तनै निहारूं कुण करयो सिणगार | Bar Bar Mein tane nihaaru Kaun Karo Singar

 

(तर्ज : बार-बार मै सीता-सीता....)

 बार-बार मै तनै निहारूं कुण करयो सिणगार, मनड़ के बीच बाबा खुब सज्यो दरबार || टेर ॥ 

मोर मुकुट कांना म कुण्डल सोवे है, होठां की या मुरली मनडो मोव है,

मुख

म बीडा रच्यो पान को सदा रहव गुलजार, मनड क बीच बाबा ॥

....

केशर, चन्दन तिलक भाल पर साजै है, बाला की या लटक देख मन नाचे है, सिर पर छत्र कमर म फेटो, मोर छडी थार हाथ, मनड क बीच बाबा ॥

....

कैसी सुन्दर दीख ह फूलां की झांकी है, बीच सिंहासन छबि आपकी बाकी है,

गल बिच शोमा करे चौगुनी रंग बिरंगा हार, मनड क बीच बाबा

जग मग ज्योति जगे थारी सबसे आगे,

बच के रहियो नजर किसी की ना लागे, सवा रूपयो भेंट में देकर, नजर देवूं म उतार ॥ मनड क बीच बाबा .... ॥

नर-नारी तेर दर्शन करन आ रहया है, श्याम मण्डल या तेरी महिमा गा रहया है, बडे प्रेम स सेबक थार कर इतर की बौछार,

मनड क बीच बाबा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

हम से जुड़े रहने के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद