श्रीकृष्ण
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव।।
गोविन्द मेरी यह प्रार्थना है, भूलूँ न मैं नाम कभी तुम्हारा!
निष्काम होके दिन रात गाऊँ, गोविन्द दामोदर माधवेती।। ॥ श्रीकृष्ण ॥
देहान्त काले तुम सामने हो, वंशी बजाते मन को लुभाते।
गाता यही मैं तन तज्यागूँ, गोविन्द दामोदर माधवेती।। ॥ श्रीकृष्ण ॥
योगी यति तापस साधु सारे, प्यारे बिना जो दुखिया विचारे।
एकान्त में शील यहीं पुकारे, गोविन्द दामोदर माधवेती।। ॥ श्रीकृष्ण ॥
देखो यहाँ भी यह दिखता है, सोचो यहाँ भी यह सुझता है।
सर्वत्र यह ही स्वर गूँजता है, गोविन्द दामोदर माधवेती।। ॥ श्रीकृष्ण ॥
प्यारे जरा तो सोचो विचारों, क्या साथ लाये अरु क्या चलोगे।
जावे यही साथ हरदम पुकारो, गोविन्द दामोदर माधवेती।। ॥ श्रीकृष्ण ॥
नाता भला क्या जग से प्यारा, आये यहाँ क्यों, कर रहे हो।
सोचो विचारों हरि को पुकारो, गोविन्द दामोदर माधवेती।। ॥ श्रीकृष्ण ॥
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव।।
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