॥ भजन श्री श्याम ॥
कोई न जाणे माया श्याम की, अजब निराली है।
त्रिलोकी को नाथ जाट कै, बन गयो हाली रै।।
सो बीघां को खेत जाट को, राम भरोसे खेती रै।
आधा में तो गेहूँ चना, आधा में दाना मेथी रै।
बिना बाड़ को खेत हमारो, श्याम रुखाली रै।। त्रिलोकी ...
भूरी भैंस चमकनी म्हारे, दो बकरी दो नारा रै।
बिना बाड़ को बाड़ो ज्यामें, बांध्यूं न्यारा न्यारा रै।
आवे चोर जड़ चक्कर काटै, काढ़ै गाली रै।। त्रिलोकी ......
जाट जाटणी निर्भय सोवे, सोवे छोरा छोरी रै।
श्याम धणी पहरा के ऊपर, क्यॉं होवे चोरी रै।
चोर लगावे नित का चक्कर, जावे खाली रै।। त्रिलोकी ...
बाजरा को रोटी खावै, ऊपर घी को लपको रै।
पालक की तरकारी खावै, भर मूली कै बटको रै।
छाछ राबड़ी को करै कलेवो, भर-भर थाली रै।। त्रिलोकी ...
धन्ना जाट को छपरो छापो, लक्ष्मी वेद खिंचायो रै।
धावलियों क ओले बैठकर, दुध खींचड़ो खायो रै।
भक्तां के संग नाचै कूदै, दे दे ताली रै।। त्रिलोकी ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
हम से जुड़े रहने के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद