सावरे की महफ़िल को संवारा सजाता है | sanvare ki mahfil Ko sanvra sajata Hai

 सावरे की महफ़िल को संवारा सजाता है,

 किस्मत वालो के घर में श्याम आता है ।।टेर।।

गेहरा हो नाता बाबा का जिनसे, 

मिलने को बाबा आता है उनसे,

उनका यह साथी बन जाता है,

संवारे की महफ़िल को संवारा सजाता है।।


किरपा बरसती है जिनपे इनकी,

 तकदीर लिखता हाथो से उनकी, 

गम का अँधेरा छत जाता है

संवारे की महफ़िल को संवारा सजाता है।।


भजन सुनते जो इनके प्यारे, 

उसके परिवार के वारे न्यारे,

मंदिर सो घर बन जाता है,

संवारे की महफ़िल को संवारा सजाता है।।


कुछ भी असम्बब होता नही है,

महफ़िल में इसकी होता यही है,

सुनील सब यहाँ मिल जाते है, 

संवारे की महफ़िल को संवारा ।।

 सजाता है,

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